DNA ANALYSIS: गलवान के बलवान इसलिए हैं चीन की सेना से बेहतर

नई दिल्ली: 15 जून को गलवान घाटी में जो हुआ उससे तो ये साफ हो गया है कि बिहार रेजिमेंट की अलग ही खासियत है. बात चाहे सर्जिकल स्ट्राइक की हो या फिर कारगिल युद्ध में विजय गाथा लिखने की, इस रेजिमेंट ने हर जगह अपने अदम्य साहस का परिचय दिया है. अपने प्राणों की आहुति देकर इस रेजिमेंट ने देश की रक्षा की है. इसीलिए इसे भारतीय सेना का एक ताकतवर रेजिमेंट माना जाता है. बिहार रेजिमेंट के जवानों ने हर युद्ध में अपने दुश्मनों को धूल चटाई है. कारगिल युद्ध में बिहार रेजिमेंट के करीब 10 हजार सैनिक शामिल हुए थे. 1971 की जंग में जब पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए थे तब भी इस रेजिमेंट की अहम भूमिका थी.

2008 मुंबई आतंकी हमले में शहीद NSG कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन भी बिहार रेजिमेंट से ही थे. सितंबर 2019 में जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले में बिहार रेजिमेंट के जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. इस हमले में बिहार रेजिमेंट के 15 जवान शहीद हुए थे.

बिहार रेजिमेंट का गठन साल 1941 यानि देश की आजादी से पहले में किया गया था. उस दौरान 11वीं बटालियन और 19वीं हैदराबाद रेजिमेंट के जवानों को नियमित करके, नई बटालियनों का गठन करके किया गया था. बिहार रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी पैदल सेना रेजिमेंट में से एक है. बिहार रेजिमेंट का मुख्यालय पटना के पास दानापुर में है. ये देश का दूसरा सबसे बड़ा कैंटोनमेंट है. फिलहाल बिहार रेजिमेंट के जवान 23 बटालियन के साथ देश की सेवा में लगे हैं.

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बिहार रेजिमेंट की खासियत ये है कि ये किसी भी हालात में रह सकते हैं. चाहे परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल हों, ये कहीं भी तैनात हो सकते हैं. बिहार रेजिमेंट का गठन भले ही अंग्रेजी हुकूमत में हुआ हो लेकिन इनकी देश भक्ति का जज्बा इतिहास में दर्ज है. कर्म ही धर्म है के स्लोगन के साथ ये देश की सेवा में रहते हैं.

बिहार रेजिमेंट के जवानों ने अपनी वीरता से देश का मान बढ़ाया है. और अब पूरा देश बिहार रेजिमेंट के जवानों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा.

चीन की सेना की कमजोरियों के बारे में पूरी दुनिया को पता है. गलवान घाटी में भारतीय जवानों की वीरता से चीन को इसका एहसास भी हो गया होगा. असल में चीन को तो पहले से ही इस बात का अंदाजा है कि खासतौर पर पहाड़ों पर होने वाली लड़ाई में चीन, भारत के सामने टिक नहीं पाएगा. हाल ही में चीन के एक रक्षा विशेषज्ञ ने भारत की सेना की तारीफ की थी, और ये माना था कि भारत की सेना पहाड़ों पर लड़ने के लिए सबसे बड़ी, सबसे अनुभवी, सबसे ताकतवर और सबसे घातक हथियारों से लैस सेना है.

चीन में Huang Guozhi (हुआंग गुओज़ी) नाम के रक्षा विशेषज्ञ ने कुछ दिन पहले ही एक डिफेंस मैगजीन में एक लेख लिया था. इस लेख का सार ये है कि पहाड़ों पर लड़ने की जो क्षमता भारतीय सेना के पास है, वैसी क्षमता ना अमेरिका के पास है, ना रूस के पास है और ना ही यूरोप के किसी देश के पास है. इस लेख में कहा गया है कि भारत की माउंटेन फोर्स दुनिया में सबसे बड़ी है और इसमें 2 लाख से ज्यादा सैनिक हैं, इतने सैनिक दुनिया की किसी माउंटेन फोर्स के पास नहीं हैं. चीन के इस रक्षा विशेषज्ञ ने लिखा था कि पहाड़ों पर लड़ने की इसी काबीलियत के दम पर भारत ने पाकिस्तान को 1984 में सियाचिन में और 1999 में कारगिल में हराया था. इस लेख में भारतीय सेना के हथियारों की भी बात की गई है और ये कहा गया कि भारत ने हाल के वर्षों में अमेरिका से जो हथियार खरीदे, उससे भारत की ताकत और बढ़ गई है. इसमें M-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोप, Apache अटैक हेलीकॉप्टर और Chinook हैवी ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर का जिक्र किया गया है.

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चीन के रक्षा विशेषज्ञ भी भारत की सेना की तारीफ करने पर इसलिए मजबूर हैं क्योंकि डोकलाम विवाद के बाद ये भारत ने चीन के साथ लगी सीमा पर अपनी तैयारियों को बहुत मजबूत कर लिया है. इस संदर्भ में अमेरिका के Harvard Kennedy School ने एक अध्ययन किया है. और चीन और भारत की सैन्य तैयारियों की तुलना की है.

अगर सैनिकों की संख्या की तुलना करें तो भारत के उत्तरी, मध्य और पूर्वी कमांड्स को मिलाकर चीन की सीमा के पास करीब सवा दो लाख सैनिक तैनात हैं. जबकि चीन के तिब्ब्त, शिन-जियांग और Western Theatre Command को मिलाकर कुल 2 लाख से 2 लाख 34 हजार के बीच सैनिक तैनात हैं. यानी सैनिकों की करीब करीब बराबरी की तैनाती है. 

दोनों देशों की वायुसेना की तुलना करें, तो चीन के Western Theatre Command के पास 157 लड़ाकू विमान हैं, जबकि चीन का सामना करने के लिए भारत के अपने 270 लड़ाकू विमान तैनात हैं. यानी लड़ाकू विमानों के मामले में भारत ने चीन के खिलाफ जबरदस्त तैयारी की है. अगर युद्ध की स्थिति आई तो फिर चीन के लिए भारत का सामना करना बहुत मुश्किल होगा. आपको ये भी याद दिला दें कि 1962 के युद्ध में भारत ने अपनी वायुसेना का इस्तेमाल नहीं किया था, नहीं तो युद्ध का नतीजा कुछ और होता.

इसी तरह से अगर दोनों देशों की परमाणु शक्ति और मिसाइलों की तुलना करें तो चीन के पास 104 मिसाइल हैं, जो भारत में कहीं भी हमला करने में सक्षम हैं. भारत के पास 10 अग्नि-3 मिसाइल हैं, जो चीन में कहीं भी हमला कर सकती हैं, इसके अलावा 8 अग्नि-2 मिसाइल हैं, जो सेंट्रल चीन को टारगेट कर सकती हैं. 8 अग्नि-2 मिसाइल ऐसी हैं, जो तिब्बत में चीन को निशाना बनाने के लिए तैयार हैं.

यानी अगर चीन ने अपनी सैन्य तैयारी की है, तो भारत ने भी कहीं कोई कमी नहीं छोड़ी. इसलिए चीन को किसी तरह के भ्रम में नहीं रहना चाहिए. ये 1962 का भारत नहीं, ये 2020 का भारत है.



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